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अनुवादक एक उद्यमवृत्ति की भूमिका में: प्रतिलेखन

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By Megha Sawhney

यह मॉडलिंगुआ के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध व्याख्यान का हिंदी प्रतिलेखन है, जिसमें बताया गया है कि कैसे एक अनुवादक उद्यमवृत्ति की भूमिका में उभर सकता है। पूरा वीडियो मॉडलिंगुआ के यूट्यूब चैनल पर देखें।

परिचय

नमस्कार दोस्तों, शुभ संध्या। आज हम कुछ बहुत ही अनोखा करने वाले हैं: कैसे अनुवादक समाज में एक उद्यमवृत्ति भूमिका निभाता है, और उसे समझना क्यों बेहद जरूरी है, उनके सत्ता संबंधों के साथ, जो हमारे समाज में व्यक्तिगत, पारिवारिक, संस्थागत, घरेलू, राज्य, देश और विदेशी परिस्थितियों में प्रस्तुत हैं। समझिए कि कैसे अनुवादक अब ना केवल एक व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो किताबें लिखता या उनका अनुवाद करता है, बल्कि एक व्यक्तित्व के रूप में भी। विचारकों ने उन अनुवादकों के बारे में सोचना और लिखना शुरू कर दिया है जो अब ना केवल किताबी स्तर पर, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी देखे जाते हैं, क्योंकि उनका व्यक्तित्व और व्यवहार यह तय करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि वे क्या लिखते और सोचते हैं, और पाठ के साथ संबंध स्थापित करने के बाद कैसे काम करते हैं।

आज हम जिस विषय के बारे में बात करेंगे वह है: अनुवादक एक उद्यमवृत्ति की भूमिका में। कोशिश यह समझने की है कि कैसे बहुभाषी एक अनुवादक की तरह अपनी भूमिका निभाते हैं और उसी समय एक उद्यमवृत्ति की तरह उभरते हैं। पहले भाग में हम जानेंगे कि कैसे अनुवादक समाज में उभर रहा है और कैसे वह देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान दे रहा है। दूसरे भाग में हम जानेंगे कि कैसे अनुवादक आज के परिवेश का हिस्सा बन रहा है और इस उद्योग में कौन से नए बदलाव आ रहे हैं जिनसे वह कैसे निपटता है। और अंत में हम देखेंगे कि कैसे टेक्नोलॉजी हमें एक उद्यमी की तरह उभरने में मदद कर रही है और कैसे हम अपनी कंपनी स्थापित कर सकते हैं। अंत करने से पहले मैं आपको कुछ विशेष बातों पर अपना खुद का अवलोकन भी दूंगा, जो अनुवादकों के उद्यमवृत्ति विकास में उतना ही महत्वपूर्ण है।

अनुवाद उद्योग का विस्तार और तकनीकी बदलाव

यह जानना आवश्यक है कि आज के आई.टी. विकास के दौर में अनुवादकों और अनुवाद की मांग में बहुत उन्नति हुई है। इस बढ़ती मांग के चलते अनुवादकों पर काफी दबाव बनता है, क्योंकि कई बार कंपनी को अनुवादित पाठ कम से कम समय में और ग्राहक की मांग के मुताबिक बनाने की जरूरत होती है। इसके लिए अनुवादक कई उपायों, प्रशिक्षणों और नई आई.टी. साधनों व तकनीकों का इस्तेमाल करता है। हाल ही में कॉमन सेंस एडवाइजरी, TAUS, GALA, TAC चाइना और इंडियन ट्रांसलेटर्स एसोसिएशन जैसे संगठनों ने अनुवाद पर काफी शोध किया है, जो यह जानने में मदद करता है कि इस उद्योग में अनुवादक किस प्रकार उभर रहा है।

इन शोधों के मुताबिक इस उद्योग में एक चलन है, जो हाल के कुछ सालों में उभरा है: यह उद्योग औसतन 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। GALA के सी.ई.ओ. हांस फेनस्टरमाकर ने "ट्रिपल ए मोमेंट" (अफ्रीका, एशिया और अरब) का विषय विकसित किया है। उसके मुताबिक, जबकि अन्य काफी उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहे थे, अफ्रीका, एशिया और अरब देश अनुवाद के उद्योग में काफी सक्रिय रहे, जिसकी वजह से अनुवाद के नौकरी के अवसरों में एक बढ़ता चलन उभर कर आया है। मुख्य बात यह निकल कर आती है कि एक अनुवादक के लिए इस अत्यंत सक्रिय और तकनीकी उन्नति के वातावरण में बने रहने हेतु आई.टी. उद्योग के साथ जुड़े रहना बहुत आवश्यक है।

अनुवाद विचारक प्रोफेसर रोजर टी. बेल बताते हैं कि नई तकनीकों के आगमन, खासकर मशीन व मशीनी साधनों के उपयोग के कारण, अनुवादक के जीवन में रुकावट आ गई है। अब अनुवाद को ना सिर्फ एक रचनात्मक क्रिया के रूप में, बल्कि एक खंडित क्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। पहले किसी भी पाठ को एक रचनात्मक वस्तु के रूप में देखा जाता था और अनुवाद को उसी स्तर पर आंका जाता था, पर अब अनुवादक शब्द-प्रतिस्पर्धा व शब्द-खंडन का इस्तेमाल करने को मजबूर है, जो अनुवाद को रचना का माध्यम कम और मशीनी जोड़-तोड़ का माध्यम ज्यादा बना रहा है। वहीं दूसरी ओर, इस मशीनी युग में बढ़ोतरी ने इस उद्योग में काम करने के अवसरों को कई गुना बढ़ाया है। इसने लोगों को मशीनी स्मृति साधनों से परिचित कराया, उन्हें तमाम केंद्रों से जोड़ा और उन लोगों से मिलवाया जिन्हें इन मशीनों व स्मृति साधनों की जानकारी है। इसी का इस्तेमाल करते हुए एशिया में पहली स्वचालित अनुवाद तकनीक का निर्माण किया गया है, जो 500 से ज्यादा भाषाओं का अनुवाद करती है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा आंकड़ा है और इस उद्योग में काफी मात्रा में नई उपलब्धियां दिला रहा है।

तब जो मुख्य प्रश्न उभर कर आते हैं वे यह हैं: क्या ये सारी क्रियाएं इसलिए बनी हैं कि वे अनुवादक की रचनात्मकता या उसकी भीतरी अनुवादकी वृत्ति को कम या नजरअंदाज करें, या ये सब उपलब्धियां आने वाले समय में एक उभरते माध्यम के रूप में बदली जा सकती हैं? हमें इन विकासों का इन दो माध्यमों के द्वारा विश्लेषण करना होगा।

मशीनी साधन: खतरा या अवसर?

मशीनी साधनों और अनुवाद-लेखन की तकनीकों, जैसे गूगल ट्रांसलेट, के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह डोमेन-विशेष, बहुभाषी कोष मशीनी साधनों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए शामिल किए जा रहे हैं। इसका मतलब है कि बहुभाषी अनुवादक, जो प्रौद्योगिकी साधनों का उपयोग जानता है, उसके लिए कार्य की उपलब्धि में बढ़ोतरी होगी। भारतीय बाजार में इन मशीनी साधनों के विकास की बात करें तो हम डॉ. हेमंत दरबारी का नाम जानेंगे, जिन्होंने "मंत्रा" अनुवाद प्रणाली विकसित की, जो भारतीय संसद में दस्तावेजों के अनुवाद व चर्चाओं में रोजाना इस्तेमाल की जाती है और खासकर संसद के सीधे प्रसारण व चर्चाओं के समय, जब कार्यभार बढ़ जाता है, काम करने व अनुवाद करने की क्षमता बढ़ाती है।

इन सबके प्रभाव के कारण हम मान बैठते हैं कि मशीन के आगमन की वजह से मशीनी साधन इंसानों का प्रतिस्थापन कर रहे हैं और अनुवादकों को हमेशा के लिए हटा देंगे, पर ऐसा नहीं है। गूगल, सामाजिक मीडिया व मशीनी साधनों की प्रतिभा के संयोजन के ढांचे का न केवल अंग्रेजी, बल्कि कई विदेशी भाषाओं में काफी विस्तार हुआ है, जिसकी वजह से बहुभाषी कंटेंट वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। यह बढ़ोतरी काफी ऊंचे स्तर पर हुई है, जिसे आंकना बेहद कठिन है, पर एक अंदाजे के मुताबिक यह करीबन 100 प्रतिशत से भी बढ़ी है। हालांकि, तुलनात्मक स्तर पर अनुवादक उस आंकड़े के मुताबिक नहीं बढ़े हैं। हम जैसे अनुवादकों के होते हुए भी सभी पाठों में से सिर्फ 0.5 प्रतिशत ही अनुवाद किए जाते हैं और बाकी 99.5 प्रतिशत रह जाते हैं।

दूसरी बात यह है कि सभी लोग ऑनलाइन नहीं होते। तो 99.5 प्रतिशत पाठों का बिना अनुवाद किए रह जाना और लोगों का डिजिटल साधनों से अपरिचित होना भी एक दूसरा पहलू दिखाता है। हमें डिजिटल दुनिया से वंचित लोगों को सहारा प्रदान करना होगा। और अगर आप वैश्विक रूप से अनुवादकों की उपस्थिति देखेंगे तो बहुत कम संख्या पाएंगे। जब मैं अनुवादकों की बात करता हूं तो मैं पेशेवर अनुवादकों की बात कर रहा हूं।

अनुवादक कितने और कहां?

अनुवाद उद्योग के नेताओं और संगठनों के बारे में जानने पर दो मूल्यवान बातें सामने आईं, और मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि विश्व बाजार में आधे मिलियन से ज्यादा अनुवादक नहीं हैं, और मौजूदा आंकड़ों से करीबन 10 से 20 गुना ज्यादा बहुभाषी अनुवादकों की दुनिया में आवश्यकता है। इसीलिए बहुत बड़ी मात्रा में अनुवादकों की कमी है, जिसकी वजह से अनुवाद उद्योग में लगातार बढ़ोतरी उचित सिद्ध होती है। कॉमन सेंस एडवाइजरी की रिपोर्ट के कुछ आंकड़े देखिए, जो 2012 से भी पहले के हैं: अफ्रीका के पास 0.27 प्रतिशत मार्केट शेयर, एशिया के पास 12.83 प्रतिशत, यूरोप के पास 49.38 प्रतिशत, नॉर्थ अमेरिका के पास 34.85 प्रतिशत। अगर हम एशिया की ओर देखें तो पिछले 5 सालों में यहां की परिस्थितियां बदली हैं और अनुवाद बाजार का उपयोग भारी मात्रा में बढ़ा है, जिसका एक कारण इंटरनेट की तेजी भी है।

भाषा सेवा के पारंपरिक व नए प्रतिमान

जब हम अनुवाद में नए प्रतिमानों को देखते हैं, जिनके बारे में मैं आने वाले कुछ मिनटों में बात करूंगा, तब तक हम अनुवादकों के ज्ञात पारंपरिक प्रतिमानों को जानते हैं: अनुवाद, वेब वैश्वीकरण, सॉफ्टवेयर वैश्वीकरण, मल्टीमीडिया वैश्वीकरण, टेक्नोलॉजी, फोन इंटरप्रेटिंग, पार्श्वस्वर, और कुछ छोटे भाग जैसे गुणवत्ता आश्वासन की जांच, उपशीर्षकरण, ट्रांसक्रिएशन (स्थानांतरसृष्टि), अनुवाद बी.पी.ओ., वीडियो इंटरप्रेटिंग और टेलीफोन इंटरप्रेटिंग। यह सिद्ध करता है कि भाषा बाजार की क्रियाएं, जिसमें कंटेंट लेखन भी शामिल है, बाकी बाजारों के मुकाबले सबसे ऊपर पाई जाती हैं।

अगर हम एक बड़े संगठन का विश्लेषण करें तो पाएंगे कि अनुवाद एक सूचित ढांचे के अनुसार किया जाता है, जहां अलग-अलग दल होते हैं: शब्दकोश के, कंटेंट के, अनुवाद स्मृति के, प्रूफरीडिंग के और गुणवत्ता नियंत्रण के। इस रेखाचित्र में हमारे पास है कंटेंट, शब्दकोश, अनुवाद स्मृति और स्थानीय कंटेंट, और हमारे पास है मशीनी अनुवाद और पेशेवर अनुवाद, जो जुड़ा है क्राउड अनुवाद, शैली अनुवाद और कार्यप्रवाह से। ये सब आपस में परस्पर जुड़े होते हैं, और किसी भी अनुवाद को सर्वर में शामिल नहीं होने दिया जाता अगर वह गुणवत्ता-नियंत्रित नहीं है। अगर बिना नियंत्रण के उसे सर्वर में डाला गया तो वह सारी अनुवाद स्मृति को प्रदूषित कर देगा। इसीलिए संगठन के लिए इस स्थिरता को बनाए रखना बहुत जरूरी हो जाता है, और उन्हें कठोर गुणवत्ता नियंत्रण के माध्यम बनाने पड़ते हैं जिससे वे अनुवाद को प्रबंधित रख सकें।

आपूर्ति श्रृंखला में नई भूमिकाएं: चार वर्गों से सीख

अनुवादकों के लिए आपूर्ति श्रृंखला में दूसरी भूमिकाओं की उपलब्धियों को जानने के लिए मैंने उद्योग के कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की, जिनमें से चार के बारे में मैं बात करूंगा। मैंने उन्हें चार भागों में बांटा: पहला है वह व्यक्ति खुद जो अनुवादक है; दूसरा है शिक्षक व अकादमिक जगत के लोग; तीसरा है वह व्यक्ति जो आपूर्ति श्रृंखला में शामिल है; और चौथा है वैज्ञानिक और अनुवाद उद्योग के नेता व संवर्धक।

पहले दो भाग शब्दावली प्रबंधक और कोश विशेषज्ञ की इंटरप्रेटर से आगे की भूमिकाओं के बारे में नहीं सोच सके। इसी प्रकार जब मैंने परियोजना प्रबंधकों व कुछ उद्योग नेताओं से बात की तो उन्होंने मुझे कुछ नाम बताए: परियोजना प्रबंधक, स्थानीय प्रबंधक, कोष विशेषज्ञ, डोमेन विशेषज्ञ, वेब डेवलपर, डीटीपी विशेषज्ञ, BPO व्यवसायी, प्रौद्योगिकी एकीकरण विशेषज्ञ और क्रॉस-सांस्कृतिक अनुसंधानकर्ता। यह जानना दिलचस्प है कि इनमें से किसी ने भी यह विचार प्रस्तुत नहीं किया कि अनुवादक एक उद्यमी के रूप में भी उभर सकता है। बाद में मैंने ही जोर देकर पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि एक अनुवादक उद्यमी के रूप में आगे बढ़ सकता है। काफी लोग इस विषय पर झिझके, पर कुछ इस विचार को लेकर बहुत सकारात्मक थे और इसे एक उपाय की तरह देख रहे थे।

इसीलिए जो मैं आपको समझाना चाह रहा हूं वह यह है कि प्रौद्योगिकी की तेजी और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के आगमन के कारण अनुवादकों के लिए यह बहुत जरूरी हो गया है कि वे खुद को एक उद्यमी के रूप में स्थापित करने के लिए कम से कम प्रयास करें। मैं बताता हूं कैसे। आजकल फ्रीलांसर ओपन-सोर्स मंचों का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं, और गूगल, फेसबुक, याहू जैसे सेवा प्रदाताओं और उनकी मुफ्त ईमेल सेवाओं के द्वारा संसाधन एकत्र करना आसान हो गया है। B2B, सामाजिक मंच और चैट मंच नेटवर्क स्थापित करने और खुद को व्यक्त करने के लिए उपलब्ध हैं। मैं मानता हूं कि इन सभी माध्यमों के द्वारा एक उद्यमी अपनी स्थापना लागत कम कर सकता है। और सामाजिक माध्यमों की विपणन तकनीकों व सर्च इंजन अनुकूलन के द्वारा आत्म-ब्रांडिंग करके उद्यमी की तरह स्थापित होना पहले की तुलना में आसान हो गया है।

सफलता के ढांचों का विश्लेषण करते हुए मैं एक सफल उद्यमी ढांचा आपके सामने पेश करूंगा: ट्रांसलेटर्स विदाउट बॉर्डर्स। देखिए कि कैसे वे अनुवादकों को तत्कालीन अनुवाद सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक बहुत सक्रिय मंच प्रदान करते हैं। तत्कालीन से मतलब है तत्काल जरूरतों में अनुवाद, जैसे चिकित्सा संबंधी जरूरतें: अगर देश में कोई दुर्घटना घटी है तो वे दवाइयों के नामों का और उन दुर्घटनाओं से बचने या निपटने के निर्देशों का अनुवाद करेंगे। अनुवादकों के एक मजबूत संजाल के चलते यह बहुत तेज गति से किया जा सकता है। वे कम लागत वाले उपाय भी उपलब्ध कराते हैं, जो संगठनों द्वारा वित्तपोषित किए जाते हैं। कई बार अनुवादक ही यह सेवाएं मुफ्त या कम पैसों में उपलब्ध कराता है, जो एक अच्छी स्थिति पैदा करता है और उन्हें काम करते रहने में मदद करता है, और यह एक दीर्घकालिक व्यापारिक ढांचा तैयार करने में मददगार साबित होता है। यह सब अनुकूल संसाधनों की उपलब्धि के कारण ही संभव हो पाया है।

उद्यमी बनने की राह

जब मैंने उन चार भागों के बारे में बात की थी, तो एक विषय यह भी था कि उद्यमी बनना आसान नहीं है। इस मुकाम के लिए बेहद लगन, महत्वाकांक्षा, खुले और सक्रिय विचारों, जोखिम उठाने की क्षमता और साथ ही अनुदान की जरूरत है। जब मैं कहता हूं कि उद्यमियों के लिए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का साथ जरूरी नहीं है, तो वह सच है, पर यह हमारी क्रियाओं को जल्दी सिद्ध करता है। दूसरे वर्ग के प्रतिवादियों ने भी मुझसे बातचीत की, जिसमें उन्होंने शैक्षिक व पेशेवर दुनिया की दूरी पर विशेष ध्यान दिया। शैक्षिक दुनिया में हम सिद्धांत व साहित्य की ओर ज्यादा ध्यान देते हैं, वहीं पेशेवर दुनिया में कहानी कुछ और होती है, जहां हमें इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और संचालन से निपटना पड़ता है, विभिन्न संस्कृतियों की विविधता का ध्यान रखना पड़ता है, और उन सभी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जो कार्यप्रणाली में सामने आती हैं। हमें अपने साथ-साथ दल के लोगों को भी प्रोत्साहित करना पड़ता है, एक सिरे से दूसरे सिरे तक, बढ़ती प्रतिस्पर्धा व उभरते रिश्ते में बने रहने के लिए। हमें हर हालत में टिके रहने का कौशल और वे सभी बुनियादी जरूरतें सीखनी पड़ती हैं जो किसी भी पेशेवर कार्यप्रणाली में जरूरी हैं, जिनकी जरूरत विश्वविद्यालयों में पढ़ते समय कभी महसूस नहीं होती।

तीसरे प्रतिवादी ने भी यही कहा कि सरकारी संपर्क होना बहुत जरूरी है, क्योंकि सरकार काफी नए उपक्रम करती रहती है, जैसे भारत में "स्किल इंडिया प्रोग्राम" और "मेक इन इंडिया प्रोग्राम", जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए हैं और खासकर हिंदुस्तानी समाज में उद्यमिता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर हम अपने विकास के तरीकों और महत्वाकांक्षाओं को मिलाने की कोशिश करें और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना शुरू करें, प्रधानमंत्री जी की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, तो मैं मानता हूं कि हम एक अनुवादक के तौर पर पहले एक छोटे उद्यमी के रूप में उभर सकते हैं और धीरे-धीरे एक बड़े उद्यमी, उससे भी बड़े निगम में तब्दील हो सकते हैं। इसीलिए हमें ना सिर्फ अपनी महत्वाकांक्षाओं को, बल्कि आसपास की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।

चौथे वर्ग ने भी सूचित किया कि वे एक अच्छी संख्या में बहुभाषीयों के संपर्क में हैं, जिन्होंने उद्यमिता की ओर अपना सफर शुरू कर दिया है, अपनी छोटी संस्था शुरू भी कर चुके हैं और बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। मैं अपने खुद के उदाहरण से समझा सकता हूं: मैं भी एक बहुभाषी हूं, और अनुवादक के पद, भाषा के प्राध्यापक होने के नाते, संचालन की ट्रेनिंग और अपने अनुभवों के द्वारा कह सकता हूं कि इन सभी चीजों के मेल की वजह से मैं एक उद्यमी के रूप में उभर सका। इसीलिए मैं मानता हूं कि अब समय है कि हम सभी नए सिरे से उन विषयों के बारे में सोचना शुरू करें जो पारंपरिक माध्यमों से अलग हों।

टीम में काम, मल्टीप्लायर इफेक्ट और बूर्द्यू का हाबिटस

अकेले, व्यक्तिगत स्तर पर काम करने से उपलब्धियां मिलना और एक दल व समुदाय के भाग की तरह उभरना मुश्किल है। बड़े व्यापार संगियों के साथ जुड़कर और विभिन्न स्तरों पर संचालन, जैसे लेखाशास्त्र, बिक्री, प्रौद्योगिकी, सामाजिक मीडिया विपणन, करते हुए हम खुद को उन तकनीकों से रूबरू करा सकते हैं जो हमें उद्यमी में तब्दील करने में सक्षम बनाएंगी। अगर आप एक संगठन में संचालक या अनुवादक की तरह काम कर रहे हैं, तो रोजाना खुद को बढ़ता देखना और कुछ नया सीखना अच्छा और जरूरी है; इससे हम एक अच्छे इंसान और अच्छे कर्मचारी बन सकते हैं। एक बार जब हम सीख लेते हैं कि अपने श्रम को कई गुना कैसे बढ़ाया जाए, जिसे मल्टीप्लायर इफेक्ट भी कहते हैं, तो हम ना केवल एक साधारण अनुवादक बनकर रहते हैं, बल्कि एक संचालक, कोश विशेषज्ञ, दल नेता, स्थानीय दल के देश नेता या स्थानीय संचालक के रूप में भी उभर सकते हैं। फिर काफी अनुवाद व विज्ञान प्राप्त करने के बाद हम उद्यमिता के लिए सक्षम होंगे।

इसे समझने के लिए मैं हमेशा एक नाम की ओर देखता हूं: पियरे बूर्द्यू, जो समाजशास्त्री हैं और जगह, सामाजिक क्षेत्र और समाज में सत्ता के रिश्तों के बारे में काफी बात करते हैं। उनके विचारों को अनुवाद की शिक्षा में भी जगह दी गई है, जो सिर्फ पाठ से नहीं, बल्कि अनुवादक से संबंध रखती है। विचार यह है कि जो अनुवाद करता है वह जरूर एक पाठ का अनुवाद कर रहा है, पर विचारकों का मानना है कि पाठ, संदर्भ, सांस्कृतिक बदलाव, शब्द से शब्द का प्रतिस्थापन न करके मतलब से मतलब का प्रतिस्थापन, यह सब विचार घूम तो रहे हैं, पर बहुत कम लोगों ने उस व्यक्तित्व के बारे में बात की है जो अनुवादक को एक व्यक्ति के रूप में देखता है। अगर हम उस विषय को समझें जिसका नाम "हाबिटस" है, जो बूर्द्यू ने दिया है, और इस सिद्धांत का इस्तेमाल करके किसी अनुवादक को दिशा देने और उसके व्यवहार-स्वरूप पर विचार करने की कोशिश करें, साथ ही उसके विकास, समाज में, शिक्षा में, मानसिकता में, सोच में और उन सभी चीजों में जो उसके चेहरे पर प्रतिबिंबित होती हैं, तो यह हमें अनुवादक के पाठ से संबंध और उसके कर्म की दशा के बारे में काफी कुछ बता सकता है। सिर्फ अनुवादित पाठ ही मायने नहीं रखता, बल्कि उस पाठ का अनुवाद करने वाला भी उतना ही मायने रखता है। अगर हम यह विचार समझ लें और अनुवादक को उसके व्यवहार और सामाजिक उपस्थिति के नजरिए से देखें, तो हम व्यक्ति-संचालक से कहीं बेहतर उपाय ढूंढ पाएंगे। इसका मतलब यह है कि अगर हम इन सब बातों को ध्यान में रखकर किसी काम के लिए अनुवादक चुनें, तो हम एक-दूसरे की काफी बेहतर तरह से मदद कर पाएंगे, और यह ज्यादातर मानव संसाधन संचालकों और हर उस संचालक पर लागू होता है जो अनुवादकों को भर्ती करता है।

सी. के. प्रहलाद का N=1 और R=G

मशीनी उपकरणों से इंसानी कौशल पर प्रभाव पड़ता है, इसमें कोई दोराया नहीं, पर वे हमें लोगों से संपर्क बढ़ाने में भी मदद करते हैं और विश्व स्तर पर नई कार्य-उपलब्धियां भी दिलाते हैं। सी. के. प्रहलाद की एक किताब पढ़ते समय मेरे दिमाग में एक विचार आया: N=1, जिसका अर्थ अब यह हो चला है कि ग्राहक और लोगों को नया अनुभव कराना, यानी हर अलग अनुभव N को 1 बनाता है; और R=G, जहां R का मतलब है रिसोर्स यानी संसाधन और G का मतलब है ग्लोबल यानी वैश्विक। इसका सीधा मतलब है कि अब संसाधन स्थानीय नहीं रह गए, वे वैश्विक हो गए हैं, और जरूरत नहीं कि हम उन सभी के मालिक बनें, पर हमें उन सबसे संपर्क रखना आवश्यक है। अगर हम इस फार्मूले का इस्तेमाल करें और उन सभी उपलब्ध माध्यमों से संपर्क स्थापित करें, तो हम खुद-ब-खुद वैश्विक नागरिक बन जाएंगे। अगर आप खुद को एक अनुवादक की तरह देखने की कोशिश करें, तो मैं मानता हूं कि मेरी तरह आप भी खुद को एक वैश्विक नागरिक की तरह देखेंगे। हमारी पहुंच सब तकनीकों तक हो गई है, पर जो आखिरी चीज बाकी रह गई है वह है ग्राहक। ग्राहक बनाने के बारे में हम अपने पिछले भाषण में ग्रीस की अपनी दोस्त इोआन्ना के साथ बात कर चुके हैं, जिन्होंने स्व-ब्रांडिंग के बारे में बात की थी।

चार मुख्य जरूरतें

इन सब पर ध्यान देते हुए हमें चार मुख्य जवाबों की जरूरत है:

  • अनुवादकों का संपर्क व संगठन, जो मॉडलिंगुआ पहले से ही शुरू कर चुका है।
  • इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी व उद्यमी प्रशिक्षण, जिसे हम अनुवाद व संचारण जैसे कोर्सों में पहले से ही शामिल कर चुके हैं, जिसके बारे में आप आने वाले समय में बेहतर सुनेंगे।
  • उद्यमी विकास केंद्र की स्थापना। ऐसे बहुत से केंद्रों की आवश्यकता है, पर एक पहले से ही मॉडलिंगुआ द्वारा स्थापित किया जा चुका है, जिसका नाम है ई.डी. केंद्र।
  • उन संगठनों के मंच की स्थापना, जिनमें से कुछ, जैसे फेसबुक, गूगल, ट्विटर, हम पहले से ही इस्तेमाल कर रहे हैं और जो विशेषकर अनुवाद उद्योग में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। मॉडलिंगुआ इस दिशा में काम कर रहा है और मुझे यकीन है कि आपके सहयोग से हम यह भी आने वाले समय में पूरा कर पाएंगे।

निष्कर्ष: उद्यमी की शुरुआत कैसे करें

अंत करने से पहले मैं कुछ बिंदुओं द्वारा निष्कर्ष प्रस्तुत करना चाहूंगा, जो किसी भी उद्यमी को स्थापित करने के लिए बहुत जरूरी हैं। हमें अपने व्यापार के लिए एक डोमेन नाम जरूर पंजीकृत करवाना चाहिए, एक वेबसाइट बनानी चाहिए, ग्राहकों व अनुवादकों का डेटाबेस बनाना चाहिए। विपणन के बारे में मैं अपने पिछले भाषणों में बात कर चुका हूं: पुश एंड पुल विपणन रणनीति, सामाजिक मीडिया के लिए और प्रोग्राम का विपणन। किसी भी कार्य के लिए काफी सक्रिय विपणन तकनीक अपनाएं और लोगों को अपनी सेवाओं के बारे में अवगत कराएं, सामाजिक मीडिया, लिखित मंच, ब्रॉडकास्टिंग और ईमेल जैसी तकनीकों के द्वारा। कम से शुरुआत करें; शुरुआत में ज्यादा पैसा लगाने की जरूरत नहीं है। एक बार सफलता मिले तो थोड़ा और बढ़ाएं, फिर एक आंकड़ा तय करें और उस पर काम दोबारा शुरू करें। सहकारिता इन सभी क्रियाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिसे आप जरूर ध्यान में रखें। मुझे पूरा यकीन है कि इससे हम ना केवल अपने लिए काम उपलब्ध करा सकते हैं, बल्कि अपने समाज के लिए भी, और आर्थिक विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।

इसी के साथ मैं आपको धन्यवाद कहना चाहूंगा, और अगर आप मुझसे जुड़ना चाहें तो इन तीन प्रस्तुत मंचों के द्वारा जुड़ने का प्रयास करें।

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